Wednesday, 4 January 2012

सामाजिक जागरण अभियान

           
    पूरी दुनिया में कुनियोजित विकास के नारों से कई तरह की विसंगतियाँ पैदा हो गई है ,जिससे आनेवाले दिनों की स्थिति और बदतर होनेवानी है .भारत की परिस्थिति तो जग जाहिर है.विश्व गुरु कहा जानेवाला यह देश आज कहाँ खड़ा है?यह गंभीर प्रश्न हम सबों के सामने है .
                       अगर हम देश की वर्तमान दुर्दशा पर धैर्य पूर्वक गहराई से सोचें तो इसके कई कारणों में प्रमुख रूप से आम आदमी की अज्ञानता और खास आदमी की मनमानी के अलावा बीच के लोगों की उदासीनता  पर नज़र जाती है.
                       आखिर कबतक हम यों ही खामोश होकर यह सब देखते रहेंगे ? वतन पर मर मिटने वाले शहीदों ने इसलिए हमलोगों के हवाले देश को नहीं किया था की आने वाली पीढ़ी हमें इस बात पर गाली दें की पुरखों की इस धरोहर की हिफाजत हम नहीं कर सकें.
                       यदि आप चाहते है कि हालात में बदलाव आये तो हाथ पर हाथ रखकर बैठने के  बजाये कमर कसकर मजबूत इरादों के साथ आगे आये. हम आपके  साथ चलने का इंतजार कर रहे है ....
                         हम सभी अपनी उदासीनता छोड़कर आम आदमी की अज्ञानता को दूर कर खास आदमी की मनमानी को रोकते हुये समाज को सम्यक समृधि की ओर ले जाते हुये लोकतान्त्रिक मूल्यों की  पूरी तरह  से रक्षा करें ताकि प्रत्येक आदमी का समग्र विकास हो सके जिससे देश और दुनिया में अमन कायम हो सके .
                           समस्याओं को गिनवाने में नहीं बल्कि उसके निराकरण की दिशा में सार्थक पहल होनी चाहिए . इसी क्रम में हम समाज के हर उम्र और वर्ग के लोगों को साथ जोड़कर एक ऐसा माहौल बनाये ,जहाँ परस्पर प्रेम और सोहार्द की अविरल धारा बहती रहे ...  
                            तो आइये SOCIETY OF SOCIAL OPINION (SOSO) नामक एक संस्था आपके इन विचारों को मूर्त रूप देने में सहयोग करने को उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही है ... संपर्क -9955773232
नोट -आपको यह विचार अच्छा लगे तो मित्रों को शेयर करे ...








Tuesday, 3 January 2012


आओ बनाये ऐसी एक दुनिया

                                                                                                         
मेरे सपनों में अक्सर
ऐसी एक  दुनिया आती है
जहाँ सब लोगों में प्रेम है                                                                                                       
और हर जगह शांति है.                                                        

मैं शामिल हूँ उस दुनिया की

कई ऐसी बाराती में                                                                                                                      
   
जहाँ ब्राह्मण  की बेटी से
डोम के बेटा की शादी है.

मैंने खाया है कई बार

चमार के घर भोज वहां

लाला ने  खाना बनाया जहाँ 
राजपूत ने पत्तल उठाया वहां .

कुशवाहा को जूता बनाते हुए
यादव को झारू लगते हुए
बनिया को भंगिगीरी करते हुए
देखा है वहां के नजारों में मैंने 
मुसहर  को पूजा कराते हुए .

कैसी हसीन दुनिया है वो
जहाँ मौलवी भी कीर्तन करते है
पंडित नमाज़ पढ़ते है वहां
पादरी व सिक्ख नहीं लडते है.

आओं बनाये हम वैसी ही दुनिया 
जहाँ हो मौजूद ये सारी खूबियाँ .

              -राघवेन्द्र सिंह कुशवाहा