मेरी कविताएँ

1-संकल्प गान

इंसानियत के रास्ते पे चलकर
जहाँ एक नया हम बनायें 
औरों के अश्कों को धोकर
सपने दूँ सुंदर नयन में
फासले दिलों का मिटाकर
दीये प्रेम का हम जलायें

इंसानियत के ...
सागर से गहरा आसमां से भी ऊँचा
हौसला मचलता हो मन में
बहे शांति धारा ह्रदय में
ज्ञान की रोशनी में हम नहायें
आगे बढ़े सबको लेकर
पूरी दुनिया को घर हम बनायें 
इंसानियत के ...


2 -विडम्बना 

लोग मानते हैं कि
भगवान की मर्जी बगैर
एक पत्ता भी नही हिलता
पर मैं नही मानता
रोज़ बहुत कुछ
ऐसा होता है
जिसे भगवान तो क्या
भला आदमी भी पसंद नहीं करता ।
चोर उचक्के अमीर बन रहे हैं
अच्छे भले फटेहाल हो रहे हैं
काली करतूत वाले सफेदपोश बनकर 
सत्ता से मौज उड़ा रहे हैं ।
बच्चे अनाथ हो रहे हैं
औरतों की मांगे सुनी हो रही हैं
बलात्कार, अपहरण , हत्या, तो सरेआम है
कुव्यवस्था की हद हो गई है ।
फिर भी लोग कह रहे हैं
भगवान की इच्छा के बिना
कोई कुछ भी नहीं कर सकता
है कोई जो कह सके मेरे अलावा ?
या तो इस कथन में दम नहीं
या फिर कोई भगवान नहीं.....


3-आओं बनाये हम एक नई दुनिया
मेरे सपनों में अक्सर 
ऐसी एक  दुनिया आती है
जहाँ सब लोगों में प्रेम है                                                                                                        
और हर जगह शांति है.                                                                                                             

मैं शामिल हूँ उस दुनिया की
 
कई ऐसी बाराती में                                                                                                                      
    
जहाँ ब्राह्मण  की बेटी से
डोम के बेटा की शादी है.

मैंने खाया है कई बार
 
चमार के घर भोज वहां

लाला ने  खाना बनाया जहाँ 
राजपूत ने पत्तल उठाया वहां .

कुशवाहा को जूता बनाते हुए
यादव को झारू लगते हुए
बनिया को भंगिगीरी करते हुए
देखा है वहां के नजारों में मैंने 
मुसहर  को पूजा कराते हुए .

कैसी हसीन दुनिया है वो
जहाँ मौलवी भी कीर्तन करते है
पंडित नमाज़ पढ़ते है वहां
पादरी व सिक्ख नहीं लडते है.
आओं बनाये हम वैसी ही दुनिया 
जहाँ हो मौजूद ये सारी खूबियाँ .

4-
ज़माना बदलता नहीं अपने आप  
 कैसा लगता है आपको 
जब किसी के आलीशान मकान में 
हवाई जहाज उतरता हो 
और किसी का पूरा परिवार 
ठिठुरता हुआ सड़क पर जिंदगी गुजरता हो ...

 कैसा लगता है आपको
जब किसी की छोटी-बड़ी  पार्टी में 
सैकड़ो टोकड़ी भोजन फेंका जाता हो 
और उसी पार्टी के बाहर भूख से तडपते बच्चे को 
रोटी के एक टुकड़े के लिए थप्पर लगती हो...

कैसा लगता है आपको 
जब किसी की मामूली इलाज पर 
महंगे अस्पताल में लाखों रु.खर्च होता हो
और कोई गंभीर बीमारी में भी 
दवा के बगैर तड़प तड़प मरता हो 

कैसा लगता है आपको
जब कोई बच्चा हर रोज नया कपड़ा
पहन पहन कर फेंकता हो
और कोई बच्चा नंगे बदन
मुट्ठी बांधे दाँत किटकिटता हो

कैसा लगता है आपको
जब किसी युवक के हाथ में
महंगा मोबाइल और आई पॉड हो
और किसी के हाथ में
रद्दी चुनने की टोकड़ी

कैसा लगता है आपको 
जब कोई लड़की हर रोज
दोस्त बदले तो शान हो
और कोई लड़की सिर्फ मुस्करा दे तो
उसकी जगह श्मशान हो

ऐसे हालात आप अक्सर
सुनते,देखते और भोगते हैं
फिर भी इनके खिलाफ
आप कुछ भी नहीं सोचते हैं

ज़रा सोचिये और बदलिए अपने आप को
वर्ना, ज़माना बदलता नहीं अपने आप 

5- हाँ तुम मुर्दा हो गए हो .....
 क्या तुम बहरे हो
जो नही सुनाई पड़ती चीखें
उन बेबस और लाचारों की
जिन पर जोर जुल्म ढाया जा रहा है ।
क्या तुम अंधे हो
जो नही दिखाई पड़ता है अत्याचार
लूट ,हत्या ,अपहरण और बलात्कार
जो अक्सर तुम्हारे सामने हो रहा है 
क्या तुम लुल्हे हो 
जो नही करते हो प्रहार
उन कारणों के खिलाफ
जो तुम्हारा सुख चैन लूट रहा है
क्या तुम गूंगे हो
जो नही करते हो प्रतिकार
उन जालिमों के खिलाफ
जो तुम्हारा सपना मिटा रहा है
तुम अंधे, बहरे, लुल्हे और गूंगे ही नहीं
हाँ तुम मुर्दा हो गए हो 
जो चुप चाप सह रहे हो
ये सारा भ्रष्टाचार  ......



6-  तेरा भी इतिहास बनेगा  
          
तेरी ख़ामोशी ही 
तेरी  बदहाली का कारण है 
तेरे  हुंकार में ही 
सारी  मुसीबतों का निवारण है .


तू इंतजार मत कर 
किसी फ़रिश्ते का 
न वो आया है न आएगा
तेरी  बगावत ही 
नया इन्कलाब लाएगा .


हर कोई अपनी परेशानी की 
लड़ाई से ही महान हुआ है
सीता हरण के बाद ही 
राम ने रावण को मारा 
माता-पिता के प्रतिशोध में 
कृष्ण ने कंस का वध किया 
ट्रेन से धक्का खाकर 
गाँधी ने अंग्रेजो को भगाया.


तू भी शुरू कर अपनी लड़ाई
तेरा भी इतिहास बनेगा 
संघर्ष की बुनियाद पर 
एक नया समाज बनेगा ...

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